हर रोज़ ईद थी साथ तेरे,...
...
अब तो
सेहरी
इफ्तारी में बंट गयी ज़िन्दगी,
तू रुख़सत क्या हुई ज़िन्दगी से,
न चांद नज़र आया फिर...
न रोज़े खत्म हुए मेरे....
   'आशु '

Comments

Popular posts from this blog