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हर रोज़ ईद थी साथ तेरे,... ... अब तो सेहरी इफ्तारी में बंट गयी ज़िन्दगी, तू रुख़सत क्या हुई ज़िन्दगी से, न चांद नज़र आया फिर... न रोज़े खत्म हुए मेरे....    'आशु '
समालोचन के मूर्धन्य संपादक डॉ अरुण देव जी के साथ चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय में....